अक्सर कहा जाता है कि हमें समाज के साथ आगे बढ़ना है लेकिन बदलती सोच ने इसमें भी कई सारे बदलाव किए हैं। अब लोग समाज नहीं बल्कि अपने परिवार का सुख और उनकी जरूरतों को देखकर आगे बढ़ना सीख गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा बदलाव देखा गया है लड़कियों के प्रति लोगों की सोच में अब वो अपनी बेटियों को अपने बेटों से कम नहीं समझते हैं बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए तैयार करते हैं। मेरा परिवार भी ऐसा ही है जो हमेशा मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है इसलिए मैं अपने परिवार का ध्यान बिल्कुल वैसे ही रखती हूं जैसे एक बड़ा बेटा रखता है।
बड़े बेटे की तरह निभाती हूं सारी जिम्मेदारियां
घर में बेटा हो ऐसा जरूरी नहीं है आजकल लोग अपनी बेटियों को इतना लायक बनाते हैं कि वो अपने परिवार का पालन पोषण अच्छे से कर पाती हैं। मैं भी करती हूं अभी मैं कॉलेज में पढ़ाई कर रही हूं लेकिन इस बात का बहुत ध्यान रखती हूं कि मेरे परिवार को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। मिडिल क्लास फैमिली में रहने वाली एक लड़की हूं जिसे अपनी जरूरतों को भुलाकर अपने परिवार का ध्यान रखना अच्छे से आता है इसलिए मैं कॉलेज के साथ-साथ फ्रीलांस काम भी करती हूं ताकि कुछ पैसे कमा सकूं। मेरे माता-पिता दोनों इस बात को बहुत गर्व से कहते हैं कि हमारी बेटी बहुत समझदार है अपने से ज्यादा हमारा ध्यान रखती है।
खुशियों की चाबी कहते हैं मुझे
हर कोई मुझे एक ही बात कहता है कि छोटी होकर भी इतनी जिम्मेदारी कैसे निभा लेती हो। लेकिन कहते हैं न जब कंधों में जान हो तो कोई काम बोझ नहीं लगता है। बस इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी सारी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा लेती हूं। इसलिए हर कोई मुझे घर में खुशियों की चाबी कहता है। मेरे पापा तो अपना बड़ा बेटा कहते हैं। वो कहते हैं कि तू ही है जो हमारे बुढ़ापे की लाठी बनेगी।
हमेशा साथ रहना और खुश रहना। कभी भी मेरे आंखों में आंसू नहीं आने देते। इसलिए हमारा परिवार खुशी-खुशी रहता है। अगर किसी तरह की कोई परेशानी आती है तो उसका सामना सब मिलकर करते हैं। इसलिए मुझे हर कोई जिम्मेदार लड़की कहता है।
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